बड़ी अजीब है ये मोहब्बत..
वरना अभी उम्र ही क्या थी शायरी करने की
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मेरे शायरी की छांव में आकर बैठ जाते है....
वो लोग जो मोहब्बत की धूप में जले होते है....
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*कल न हम होंगे न गिला होगा।*
*सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा।*
*जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें।*
*जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।*


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💞आ जाते हैं वो भी रोज ख्बाबो मे, 💖

💝जो कहते हैं हम तो कही जाते ही नही💕
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अल्फाजों का अहम् किरदार रहा है दूरियां बढाने में,
कभी वो समझा न पाए, कभी हम समझा न पाए..!
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सीने मे जो दब गए हैं, वो जज्बात क्या कहें,
खुद ही समझ लीजिए, हर बात क्या कहें..!
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इश्क चख लिया था इत्तफ़ाक से,
ज़बान पर आज भी दर्द के छाले हैं..!
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खींच कर उतार देते हैं उम्र की चादर..
ये कम्बख्त दोस्त.. कभी बूढ़ा नहीं होने देते..!
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