जाने ऐसी भी क्या दिल ❤️️ लगी थी तुमसे 👫,
मैंने 👩 आखरी खाव्वाहिस में भी तेरी मोहब्बत 💑 माँगी.
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ना महीनों की गिनती है ना सालों का हिसाब है

,मोहब्बत आज भी तुमसे बेपनाह बेहिसाब है.
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दिल खोल के कर दी नुमाइश ख़ुद की...
बता मेरे पास खुद का अब बचा क्या है..
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!!..कोशिश तो होती है तेरी हर ख़्वाहिश पूरी करूं
पर डर लगता है की तू ख़्वाहिश मे मुझसे जुदाई ना मांग ले..!!
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शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है..🙏🙏
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है...🤗🤗
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ऐसे माहौल मे दवा क्या है दुआ क्या है
जहाँ कातिल ही खूद पूछे की हुआ क्या है
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आराम से कट रही थी तो अच्छी थी जिंदगी
तू कहाँ इन आँखों की बातों में आ गयी।
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इन ग़म की गलियों में कब तक ये दर्द हमें तड़पाएगा..
इन रस्तों पे चलते-चलते हमदर्द कोई मिल जाएगा.
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