देख कर मेरी आँखें, एक फकीर ये कहने लगा;
पलकें नाज़ुक है, खवाबों का वज़न कम कीजिये..!
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तुझे चाहना मेरी चाहत नही;
आदत है ....
मेरी आदते मेरे सिवा कोई
बदलवा नही सकता
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बेशुमार सा कुछ लिखना था..
मैने तुझ पर 'एतबार' लिख दिया..!!
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आ कर 'ख़यालो' में मेरे बाकी जहाँ 'बेख्याल' कर जाते हो..
हमें भी सिखा दो 'हुनर' कैसे ये 'कमाल' कर जाते हो..!!
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हमारी नीदं भी बडी बेरवाह हो गई है;
तेरी ही तरह कही जाकर छुप गई है!!
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उसका हँसकर 'नज़र' झुका लेना
सारी शर्तें क़ुबूल हों जैसे..
कितनी दिलकश है उसकी 'ख़ामोशी'
सारी बातें फ़ुज़ूल हों जैसे..!!
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जिनके उपर जिम्मेदारीयों,*
*का बोझ होता है,*
*उनको* *,*
*'रुठने' और 'टूटने' का*
*हक नही होता..!
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ना जाने कितने दर्द समेटे, जिगर में अपने,
चली जा रही है जिंदगी, दबे पाँव, हौले हौले .
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