एक तो ....मन ख्वाहिशों में अटका रहा...
और
जिंदगी हमें जी कर चली गयी'
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अज़ीज़ इतना ही रक्खो की जी संभल जाए ,
अब इस क़दर भी न चाहो की दम निकल जाए ..
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शतरंज खेलते रहे वो हमसे कुछ इस कदर;
कभी उनका इश्क़ मात देता तो कभी उनके लफ्ज़!.
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"Khuda Ne Jabb tujhe Banaya Hoga
Ik Saroor Uske Dil Mein Ayea Hoga
Socha Hoga Keya Doonga Tohfe Mein Tujhe
Tabb Jaake Usne Mujhe Banaya Hoga..
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जिनका मिलना नही होता किस्मत में ..
उनकी यादें कसम से कमाल होती है..
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कभी हक़ीक़त में भी बढ़ाया करो ताल्लुक़ हमसे..
अब ख़्वाबों की मुलाक़ातों से तसल्ली नहीं होती..
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दुश्मन सामने आने से भी डरते थे..
ओर तू पगली दिलसे खेलके चली गयी क्या बात है
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.*अब कहाँ जरुरत है हाथों में पत्थर उठाने की*

*तोड़ने वाले तो लफ्जों से ही दिल तोड़ देते हैं*
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