दे दिया इश्क़ की नौकरी से इस्तीफ़ा हमनें, कि अभी उम्र नहीं इतने ग़म कमाने की..
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कुछ नहीँ था मेरे पास खोने को, जब से मिले हो तुम डर गया हूँ मैँ
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#धुंध बहुत हैं शहर में,
फिर भी वो मुझसे #टकराता क्यों नहीं..?
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किस मुँह से इल्ज़ाम लगाएं बारिश की बौछारों पर, हमने ख़ुद तस्वीर बनाई थी मिट्टी की दीवारों पर !!
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जो इस दुनियाँ में नहीं मिलते , वो फिर किस दुनियाँ में मिलेंगे जनाब.. बस यही सोचकर रब ने एक दुनियाँ बनायी , जिसे कहते हैं ख्वाब।
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ताला लगा दिया दिल को.. अब तेरे बिन किसी का अरमान नहीं.. बंद होकर फिर खुल जाए, ये कोई दुकान नहीं।
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एम्बुलेंस सा हो गया है ये जिस्म, सारा दिन घायल दिल को लिये फिरता है।
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काग़ज़ पे तो अदालत चलती है.. हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये।
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