ये भी अच्छा है की सिर्फ सुनता है दिल,
अगर बोलता तो कयामत हो जाती..
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मुझे अपने किरदार पे इतना तो यकीन है!कोई मुझे छोड़ सकता है, पर भुला नही सकता...
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महफ़िल मैं कुछ तो सुनाना पड़ता हैं,
गम छुपाकर मुस्कुराना पड़ता हैं,
कभी उनके हम थे दोस्त,
आजकल उन्हें याद दिलाना पड़ता हैं।
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अब तो पत्थर भी बचने लगे है मुझसे,

केहते है अब तो ठोकर खाना छोड़ दे.
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कैसे यकीन करें हम तेरी मोहब्बत का,
जब बिकती है बेवफाई तेरे ही नाम से।
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टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी,
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
कि मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी।
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इश्क़ के खुमार में उसे अपनी जिंदगी बना लिया,
जब भी उसकी याद आई दिल थामकर रो लिया,
वफ़ा का नाम देकर उसने बेबफाई की तो क्या हुआ,
जिंदगी थी वो मेरी उसके दिए सारे ग़म बर्दाश्त कर लिया।
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कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी।
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