इश्क़ ने जब माँगा खुदा से दर्द का हिसाब,
वो बोले हुस्न वाले ऐसे ही बेवफाई किया करते हैं।
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वो कब का भूल चुका होगा हमारी वफ़ा का किस्सा,
बिछड़ के किसी को किसी का ख्याल कब रहता है।
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जो जले थे हमारे लिऐ,
बुझ रहे हैं वो सारे दिये,
कुछ अंधेरो ने की थी साजिशें,
कुछ उजालों ने धोखे दिये.
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समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से
अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी।
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तस्वीर में भी बदले हुए हैं उनके तेवर,
आँखों में मुरब्बत का कहीं नाम नहीं है।
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कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये,
दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह,
वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए,
सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह।
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उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा,
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।
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बेवफाई उसकी दिल से मिटा के आया हूँ,
ख़त भी उसके पानी में बहा के आया हूँ,
कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को,
इसलिए पानी में भी आग लगा कर आया हूँ।
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