सब कुछ तो है, क्या ढूंढती रहती है निगाहें।

क्या बात है मैं वक़्त पर घर क्यूँ नहीं जाता।।💔 😢
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कुछ इस तरह तेरी गली मे दिन से रात करना..

कभी इस से बात करना, कभी उस से बात करना..!!!😭 💔 😢
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मुकद्दर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो,

देर से क़िस्मत खुलने वालों का दुगुना फ़ायदा हो।💔 😢
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आज के बाद ये रात और तेरी बात नहीं होगी😭 💔
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ख्वाब हमारे टूटे 💔 तो हालात कुछ ऐसी थी,
आँखे पल पल रोती थीं ,किस्मत हँसती रहती थी💔 😢
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तेरे ना होने से बस इतनी सी कमी रहती है

मै लाख मुस्कुराउ आखो मे नमी सी रहती है.💔 😢
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*हर एक दुआ में हम तो यही कहते हैं।*

*वो सदा खुश रहें जो दिल में मेरे रहते हैं।
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शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
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