हर एक रूह में एक ग़म छुपा लगे हैं मुझे;
ये ज़िन्दगी तो कोई बद-दुआ लगे है मुझे;

जो आँसू में कभी रात भीग जाती है;
बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे;

मैं सो भी जाऊँ तो मेरी बंद आँखों में;
तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे;

मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ;
वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे;

मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह;
ये मेरा गाँव तो पहचाना सा लगे है मुझे;

बिखर गया है कुछ इस तरह आदमी का वजूद;
हर एक फ़र्द कोई सानेहा लगे है मुझे।
Share On Whatsapp




एक क़तरा मलाल भी बोया नहीं गया;
वो खौफ था के लोगों से रोया नहीं गया;

यह सच है के तेरी भी नींदें उजड़ गयीं;
तुझ से बिछड़ के हम से भी सोया नहीं गया;

उस रात तू भी पहले सा अपना नहीं लगा;
उस रात खुल के मुझसे भी रोया नहीं गया;

दामन है ख़ुश्क आँख भी चुप चाप है बहुत;
लड़ियों में आंसुओं को पिरोया नहीं गया;

अलफ़ाज़ तल्ख़ बात का अंदाज़ सर्द है;
पिछला मलाल आज भी गोया नहीं गया;

अब भी कहीं कहीं पे है कालख लगी हुई;
रंजिश का दाग़ ठीक से धोया नहीं गया।

Share On Whatsapp




सीने में जलन..

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान-सा क्यों है;
इस शहर में हर शख़्स परेशान-सा क्यों है;

दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे;
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान-सा क्यों है;

तन्हाई की ये कौन-सी मंज़िल है रफ़ीक़ो;
ता-हद्द-ए-नज़र एक बियाबान-सा क्यों है;

हमने तो कोई बात निकाली नहीं ग़म की;
वो ज़ूद-ए-पशेमान, परेशान-सा क्यों है;

क्या कोई नई बात नज़र आती है हममें;
आईना हमें देख के हैरान-सा क्यों है।

Share On Whatsapp




झूठा निकला क़रार तेरा;
अब किसको है ऐतबार तेरा;

दिल में सौ लाख चुटकियाँ लीं;
देखा बस हम ने प्यार तेरा;

दम नाक में आ रहा था अपने;
था रात ये इंतिज़ार तेरा;

कर ज़बर जहाँ तलक़ तू चाहे;
मेरा क्या, इख्तियार तेरा;

लिपटूँ हूँ गले से आप अपने;
समझूँ कि है किनार तेरा;

'इंशा' से मत रूठ, खफा हो;
है बंदा जानिसार तेरा।
Share On Whatsapp




मैं खुद भी सोचता हूँ..

मैं खुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है;
जिसका जवाब चाहिए, वो क्या सवाल है;

घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था;
क्या मुझसे खो गया है, मुझे क्या मलाल है;

आसूदगी से दिल के सभी दाग धुल गए;
लेकिन वो कैसे जाए, जो शीशे में बल है;

बे-दस्तो-पा हू आज तो इल्जाम किसको दूँ;
कल मैंने ही बुना था, ये मेरा ही जाल है;

फिर कोई ख्वाब देखूं, कोई आरजू करूँ;
अब ऐ दिल-ए-तबाह, तेरा क्या ख्याल है।
Share On Whatsapp




कब याद मे तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं;
साद शुक्र की अपनी रातो में अब हिज्र की कोई रात नहीं;

मुश्किल है अगर हालत वह, दिल बेच आए, जा दे आए;
दिल वालो कूचा-ए-जाना में, क्या ऐसे भी हालात नहीं;

जिस धज से कोई मकतल में गया, वो शान सलामत रहती है;
ये जान तो आनी-जानी है, इस जान की तो कोई बात नहीं;

मैदान-ए-वफ़ा दरबार नहीं, या नाम-ओ-नसब की पूछ कहाँ;
आशिक तो किसी का नाम नहीं, कुछ इश्क किसी की जात नहीं;

गर बाज़ी इश्क की बाज़ी है, ओ चाहो लगा दो दर कैसा;
गर जीत गए तो क्या कहने, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं।
Share On Whatsapp




*Nice line*
किसी शायर ने अपनी अंतिम यात्रा
का क्या खूब वर्णन किया है....

था मैं नींद में और
मुझे इतना
सजाया जा रहा था...

बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था...

ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर
में...

बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा
था...

था पास मेरा हर अपना
उस
वक़्त...

फिर भी मैं हर किसी के
मन
से
भुलाया जा रहा था..

जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों
से...

उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर
लुटाया जा रहा था..

मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर...

जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था..

काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर...
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जा रहा था...
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलों में
मेरे
लिए...
.
उन्हीं दिलों के हाथों,
आज मैं जलाया जा रहा था!!!

🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂
👌 लाजवाब लाईनें👌
🍁🍂🍁🍂🍁🍂🍁🍂

मिली थी जिन्दगी
किसी के 'काम' आने के लिए..

पर वक्त बीत रहा है
कागज के टुकड़े कमाने के लिए..
क्या करोगे इतना पैसा कमा कर..?
ना कफन मे 'जेब' है ना कब्र मे 'अलमारी..'

और ये मौत के फ़रिश्ते तो
'रिश्वत' भी नही लेते..
Share On Whatsapp




Woh Silsile, Woh Shauq, Woh Aadat Nahin Rahi;
Phir Yeh Hua Ke Dard Mein Shiddat Nahin Rahi!
Share On Whatsapp